राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने आजके दिन 1873 में ये पुस्तिका प्रसिद्ध की थी। शिक्षा और सामाजिक क्रांति के प्रणेता के रूप में ज्योतिबा को हम जानते है। वैसे ही वो उत्कृष्ठ लेखक और साहित्यकार भी थे। उसका उदाहरण है ये गुलामगिरी और कई ओर पुस्तके।
ये ग्रंथ एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है की ब्राह्मणों ने अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए कैसे अंग्रेजो के शासन में भी शुद्रो-अतिशूद्रों का शोषण किया और आज का आर्यभट (ब्राह्मण) इस देश का मूलनिवासी नहीं है किंतु विदेशी है और कैसे यहाँ के मूलनिवासियो को गुलाम बना के रखा है।
145 साल पहले लिखे गए इस ग्रंथ में शुद्रो के शोषण का जो वर्णन बताया है उसमे आज भी कोई ज्यादा सुधार नहीं दिख रहा । गुलामगीरी ग्रंथ सही रूप में एक विस्फोटक ग्रंथ है। इस ग्रंथ ने उस समय जो विस्फोट किया था उसकी तीव्रता आज भी कम नहीं हुई है। इस ग्रंथ से राष्ट्रपिता फुले की मौलिक विचार धारा औऱ उनके आंदोलन के लक्ष्य के बारे में जानकारी मिलती है। हमारे ज्यादातर पढ़े लिखे लोग आज भी ब्राह्मणवाद की चंगुल में फसे हुए है। या तो वे अपना इतिहास नहीं जानते या वो भयभीत है - ईश्वर से, आत्मा से, पुनर्जन्म से, भाग्य से,स्वर्ग नरक की फिक्र से। मतलब इन सारे काल्पनिक भय से वे हिंदु धर्म से मुक्त नहीं हो रहे ।
दिनांक - 01/06/2018, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले लिखित पुस्तक "गुलामगिरी" प्रकाशन दिवस.. |
इस ग्रंथ से पता लगेगा कि ब्रह्मा,विष्णु,नरसिंह,मत्स्य, वराह,वामन ये कोई ईश्वर नही थे बल्कि आक्रमणकारी आर्यो के सरदार थे जिन्हों ने हमारे मूलनिवासी राजाओ जैसे की हिरण्य कश्यप, बली राजा,बाणासुर ,महिषासुर जैसे कई प्रतापी राजाओ की षड्यंत्रपूर्वक हत्या कर के भारत के मूलनिवासियो को गुलाम बनाया था ।
बुद्ध को पढ़ ने से पता चलेगा कि ईश्वर,आत्मा,ब्रह्म, अवतार,स्वर्ग-नरक आदि सब भ्रम है और ब्राह्मणों के वर्चस्व बनाये रखने की केवल एक अमानवीय व्यवस्था है । हमारे लोगो को ब्राह्मण धर्म से मुक्ति चाहिए तो गुलामगिरी पढ़ना आवश्यक है वरना जो गुलामगिरी आज भी कर रहे है उन से मुक्ति नही मिलेगी । हमारी ये अज्ञानता होगी कि आज भी हम बाबा साहब के बताए विचारो पर संदेह कर रहे है ।
- अनित्य बौद्ध
"गुलामगिरी" पुस्तक पढने के लिए व् डाऊनलोड करने के लिए निचे दिए गई लिंक पर क्लिक करे : गुलामगिरी
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